महापंडित राहुल सांकृत्यायन — वो नाम जिसके सामने हर ट्रैवलर को झुक जाना चाहिए
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ ~ ख़्वाजा मीर दर्द […]
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ ~ ख़्वाजा मीर दर्द […]
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥— कबीर कबीर ने पाँच
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना — तो फिर सिखाता क्या है? अगर अल्लामा आज ज़िंदा होते, तो सबसे
“मज़हब जब दिल से निकल कर दिमाग़ में चढ़ जाए तो ज़हर बन जाता है।” ~ मंटो कम समय रह
हम वो ढूँढ रहे हैंजो इंसान को अंत में सुकून से मर जाने के लिए चाहिए होता है।तेल-पानी खाना-पीना सोना-जागनासबजैसे सुकून से जीने
आज भी हर साल की तरह अप्रैल की बीसवीं तारीख है और दुनिया भर की चरसी-गंजेरी-भंगेड़ी जमात अपने अपने सोशल
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती, जिसको हम राष्ट्रीय युवा दिवस के नाम से मनाते हैं. सुबह सुबह आंख खुली तो
चांद चकोर नहीं, आसमान के माथे का घाव है. बादलों में धुआं रम चुका,दूर कहीं क्षितिज की लाली के पीछेबिलखती-बोलियां बुलंद आवाज़ें बन
घुमक्कड़ी, यायावरी या फिर ट्रेवल, जो जी चाहे कह लीजिए पर जब भी कोई इंसान अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर
गुरु भगत सिंह का मानना था कि आज़ादी बिना लड़े नहीं मिला करती, और आज़ादी की लड़ाइयां बिना बड़ी क्रांतियों