Fitoornama
← सफ़रनामा · TRAVEL

जगह बदनाम, सरचू है नाम!

Sarchu on Leh-Manali Highway
जगह बदनाम, सरचू है नाम!

एक्सपीरियंस्ड बंदरलस्टियों में इस बात के दावे भरपूर एग्ज़ैम्पल्ज़ के साथ प्रचलित हैं कि सरचू वह जगह है जहां अच्छे-से-अच्छा बंदरलस्टिया अपना बंदर और अपना लस्ट, दोनों अलग-थलग पड़ा पाता है। सरचू तीन दिशाओं से घाटियों से घिरा हुआ है, जिससे यहां हवा का हाहाकार मचा रहता है — बिल्कुल वैसे ही जैसे आप की दिल्ली सरकार पर केंद्र सरकार का कब्ज़ा है, पता नहीं कब से! इन हवाओं से छुपने की कोई जगह मिलती ही नहीं, इसलिए यहां पहुंचते ही पहले साँसों पर किश्तें बंधती हैं, फिर सर्दी से घिग्गी बंधती है।

सरचू में जिन टेंट्स में हम रुके, वहां लोकचंग भाई मिले — सरचू गांव के बाशिंदे।

“गांव किधर है?” — यह पॉसिबिलिटी हमने पहले क्यों नहीं सोची, यह सोचकर हमें भरपूर बंदरलस्टी-प्राइड का अनुभव हुआ।

हाईवे पर दिखने वाले सरचू से परे, नदी के उस पार, कोई पांच किलोमीटर जाकर गांव है।

“बिजली नहीं है। गांव का अपना सोलर पैनल लगा है, रौशनी उसी से होती है सबके घर में। नेटवर्क भी तभी तक रहता है जब तक ट्रैवलर्स का सीज़न चालू है।” — लोकचंग भाई ने स्माइल की। लाहौल साइड के बंदों की स्माइल बड़ी मिस्टीरियस होती है।

Sarchu, Himachal Ladakh Border
Sarchu River Bank

वैसे भी, सरचू जैसी जगहों की कोई एक ‘डिफ़ाइंड आइडेंटिटी’ होना मुमकिन होने के ठीक उलट है। हाईवे वाले सरचू पर Jio वालों ने 4G का खंभा तो लगाया है, पर हां, ट्रैवलर्स की भीड़ ख़त्म होते ही वे उसे झट-पट समेट ले जाते हैं। अभी हाईवे चालू है तो गांव तक नेटवर्क आता है। कभी-कभार कोई सरफिरा फिरंगी भटक आए तो आए, वरना न बंदा न बंदे की जात।

Sarchu to Baralacha Road on Manali Leh Highway सरचू
Sarchu Road on Leh Manali Highway

सरचू हिमाचल और लद्दाख़ की सरहद है। पर बॉर्डर बनने से पहले, यह इन दो जगहों को जोड़ने का मुख्य ज़रिया था — यानी, जब लेह-मनाली हाईवे वजूद में नहीं आया था, और लोग लेह से मनाली की दूरी पैदल तय करते थे, तब बारालाचा पास पार करने से पहले सरचू ही रास्ते का मुख्य पड़ाव हुआ करता था। वजह कई हैं। पहली, लेह से मनाली की ट्रेल पर, मोरे प्लेन्स को छोड़ दें तो, इतना बड़ा ठहरने लायक मैदान और कहां मिलता है। दूसरी, गाटा लूप्स उतरने के बाद त्सराप नदी मिलती है, सो लंबी दूरी तय कर चुके राहगीरों के लिए यहां रुकना राहत का काम करता था। तीसरी, जब सफ़र मोटरसाइकिल या गाड़ियों पर नहीं बल्कि घोड़ों और घोड़ा-गाड़ियों पर तय होता था, तब सरचू का खुला मैदान जानवरों के लिए घास से लबालब भरा मिलता था। पानी, खाना, ठहरने के लिए खुला मैदान, और बगल में इंसानी बस्ती — सरचू गांव — लंबे सफ़र में पड़ाव डालने के लिए इससे बेहतर जगह भला और क्या होगी।

Sarchu on Leh-Manali Highway
An eagle eye view of Sarchu on the Leh-Manali Highway.

इसीलिए सरचू सिर्फ़ एक जगह नहीं, बल्कि मनाली और लेह के बीच का एक अहम अड्डा है। जब-जब हम इस रास्ते निकले, हमारा पड़ाव हमेशा यहीं रहा। फिलहाल, पेट्रोल-डीज़ल को छोड़कर, अपनी यात्रा जारी रखने के लिए लगभग सब कुछ यहां मिल जाता है।

बारालाचा पास के बाद से पांग तक, ध्यान से देखें तो पुराना मनाली-लेह ट्रेल रूट, हिस्सों में ही सही, पर सड़क के दायें-बायें अब भी दिख जाता है। इस ट्रेल पर अब शायद ही कोई चलता हो, पर एक दौर था जब सड़क नहीं हुआ करती थी और यही मनाली-लेह का मुख्य रास्ता था। कभी मौक़ा लगा तो इस ट्रेल को फोटो-स्टोरी के ज़रिए ज़रूर आपसे शेयर करेंगे।

Scroll to Top