Gandhi से बड़ा ट्रेवल इन्फ्लुएंसर कोई नहीं!
घुमक्कड़ी, यायावरी या फिर ट्रेवल, जो जी चाहे कह लीजिए पर जब भी कोई इंसान अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आता है और वो सब चीज़ें करने की कोशिश करता है जो वह आम तौर पर करने की सोच भी नहीं सकता है, तो ये सारी चीज़े इंसानी ज़हन पर बहुत गहरा असर करती हैं। फिर चाहे वह इंसान कितनी ही बड़ी शख़्सियत क्यों न हो, चाहे वह गाँधी ही क्यों न हो! गाँधी की तरह ही हर किसी के पास कोई न कोई गोखले भी ज़रुर होता है जो उसे यह बताता है कि क्या जरूरी है।
मोहन दास करम चंद गाँधी से महात्मा गांधी बनने के सफ़र में गाँधी का सिर्फ नाम नहीं बदला था। उनका चरित्र, उनकी सोच, रहन सहन और व्यक्तित्व, सब कुछ बदल गया था। इन सभी बदलाव की मुख्य वजह गाँधी का ट्रेवल ही रहा है फिर चाहे वो पोरबंदर से लंदन तक वकालत की पढ़ाई के लिए किया गया सफर हो या फिर दक्षिण अफ्रीका में वक़ालत के दौरान हुई बातें। यह वही वक़्त था जब गाँधी ने पहली दफ़ा कस्तूरबा से अपना मैला खुद ढोने की बात कही थी। .
अपने लिए उदाहरण, इंस्पिरेशन, लर्निंग – सब बापू ही हैं! 150वां हैप्पी बर्थडे है आज! देसी ट्रैकिंग स्टिक लेकर पूरा इंडिया ट्रेक किएला है भाई बाप ने! और घूम घूम कर ही, क्या उधम मचाया! गांधी की यात्राओं में आपको सेल्फ़ एस्टीम का टूटना, बेसिक सवाल पूछना, गलत और सही को नई समझ देना, एक इन्फ्लुएंसर होना और ऐसी कई चीज़ें मिल जाएंगी जो अपनी यात्राओं पर हम आप भी एक्सपीरियंस करते हैं. .
हमारे लिए तो बापू #travelgoals में आते हैं. .
घूमो तो ऐसा घूमो! .


